Thursday, September 5, 2013

Punjabi Weds Pahadi Audio Preview





Twishaa Sandhu                                              
Mona Bhatt Sings for Punjabi Weds Pahadi

 

Uttarakhand Dhari Devi New Temple Design



उत्तराखंड में ऐसा होगा धारी देवी मंदिर  जी.वी.के कम्पनी द्वारा धारी देवी मंदिर के नए स्वरूप का मॉडल प्रस्तुत किया गया है। नया मंदिर 18 खम्बो पर नदी के 613 मीटर उपर होगा।मंदिर के आगे एक विशाल मैदान,कथा स्थल,धर्मशाला,मंदिर समिति का ऑफिस वो मैदान के चारो और तीन मीटर का रास्ते के साथ ही अन्य सुविधाए होगी। मंदिर का निर्माण गढ़वाली,कत्यूरी वो यमुना वेली की क्षत्रप शेली से होगा।
 


Kailash Mansarovar Yatra Uttarakhand




यह कैलाश मानसरोवर का एक सुन्दर दृश्य है जो की कभी उत्तराखंड के कुमॉऊ क्षेत्र का अभिन्न अंग था लेकिन आज हमें यहाँ पहुँचने के लिए चीन का वीज़ा लेना पड़ता है।
सावधान सावधान ......भारत में उत्तराखंड की चीन की सीमा में एक बहुत बड़ी प्लानिंग चल रही है। चीन पूरे ग्रेटर हिमालय को अपना हिस्सा मनता है जिसमे हिन्दुओं के पवित्र धाम "गंगोत्री ,यमनोत्री एवं बद्रीनाथ, केदारनाथ" शामिल हैं पहले भी हिंदी चीनी भाई भाई बोलकर चीन ने उत्तराखंड के कुमॉऊ क्षेत्र में स्थित हिन्दुओं के पवित्र धर्मस्थल "कैलाश मानसरोवर" पर अपना कब्ज़ा कर लिया था और हमारी सरकार ऑंखें बंद कर यह नज़ारा देखती रह गई। उत्तराखंड पर अगर चीन का कब्ज़ा हो गया तो यहाँ पर बने बांधों को ध्वस्त कर वह दिल्ली तक के हिस्से को जलमग्न कर एक बहुत बड़ी तबाही मचा सकता है जो की दुनिया में सबसे बड़ी तबाही होगी। चीन ने अपने बोर्डर तक सड़क ही नहीं अपितु हिमालयी उच्च एवं कठिन पहाड़ी श्रृंखलाओं में अपनी आर्मी के लिए एक बहुत बड़ी रेलवे लाइन तक बिछाई है जिससे वह बहुत ही भारी भारी युद्धपोत हिमालय के क्षेत्र में पहुँचा सके लेकिन भारत सरकार ने हिमालय के क्षेत्र में अपनी सीमाओं को अभी तक सड़कों से भी नहीं जोड़ सका है।
 


Vally Of Flowers In India Uttarakhand


फेसबुक उत्तराखंड


उत्तराखंड में 80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी
  
उत्तराखंड की गोद में समाई एवं 80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी ने पूरी दुनिया में अपना एक अहम् स्थान बनाया है। इसी लिए यूनिस्को ने इसे "वर्ल्ड हेरिटेज" की उपाधि दी है लेकिन हमारी भारतीय सरकार को तो शायद इस बात पर गर्व ही नहीं होता की दुनिया की सबसे सुन्दर एवं सबसे बड़ी फूलों की घाटी हमारे देश में है जो की स्विज़ेर्लैंड के पर्यटन को भी काफी पीछे छोड़ सकती है लेकिन यह तभी हो सकता है जब यहाँ पर उच्चस्तरीय इन्फ्रास्ट्रकचर एवं यात्रा की मूलभूत सभी सुविधाएँ प्रदान की जाएँ। हमारे देश का रूपया जो डॉलर के मुकाबले कमज़ोर हुआ है मुझे पूरा यकीन है की उच्चस्तरीय इन्फ्रास्ट्रकचर एवं यात्रा की मूलभूत सभी सुविधाओं से युक्त होने पर यह फूलों की घाटी पूरी दुनिया के पर्यटन को खींचकर हमारे देश में इतना विदेशी मुद्रा एकत्रित कर देगी की एक दिन डॉलर के मुकाबले रूपया ही पूरी दुनिया में राज़ करेगा।
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धन्यवाद

Wednesday, September 4, 2013

Uttarakhandi Frouts

Uttarakhandi Frouts




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Uttarakhandi Malta




Uttarakhandi Pahadi Akhrot
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Uttarakhandi Pahadi Aaroo(Aadu)
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Uttarakhandi Pahadi Frout Ghingharu

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 Uttarakhandi Frout Khumani

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Uttarakhandi Frouts 1.Red Hisar 2.Black hisar 3.Yellow Hisar 4.Kingod
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uttarakhandi Frout Red Hisar
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Uttarakhandi Malta
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Uttarakhandi Frout Polam

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Narilta

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Chyunta

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Uttarakhandi Frout Limba
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Uttarakhandi Frout Narangi
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Uttarakhandi Apple
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SUNDARGARH IN GHURDAURSYUN A HISTORY OF UTTARAKHAND

SUNDARGARH IN GHURDAURSYUN A HISTORY OF UTTARAKHAND

HISTORY OF UTTARAKHAND...............
Sundargarh is a one of the biggest garh in uttarakhand but till today sundargarh is not recognized in the bavan garh of garhwal.
surrounded villages sanyu , pipali ,dharkot ,tal , rishi , balbyo , ithuru etc

क्या आप जानते हैं कि राजा घुरदेव दरबार के नाम से घुरदेवस्यूँ(घुडदौडस्यूँ) की पट्टी का नाम है क्योँ कि वे इस पट्टी के कबीलाई राजा थे । इससे पहले वे गुजरात के महसाणा के राजा थे लेकिन मुगलोँ के आक्रमण ने इन्हेँ उत्तराखंड की ओर खदेड दिया था। इनकी पत्नी कैँत्यूरा वँश की राजकुमारी सुन्दरा थी जिनके नाम से राजा घुरदेव दरबार ने घुडदौडस्यूँ मेँ सुंदरगढ़ बनवाया। शँकराचार्य ने इनकी पूरी सेना के नाम के पीछे दरबार कीजगह गुसाईँ की उपाधि देकर घुरदेव के गुसाँई राजपूतोँ का एक नया पन्ना इतिहास में जोड दिया।  सुंदरगढ़ आज केवल गढवाली जागरोँ में ही जीवित है। गढ़वाल के बावन गढोँ मेँ अभी तक सुंदरगढ़ का शुमार क्यों नहीं होता इस पर चर्चा होनी बहुत जरुरी है वो भी तब जब यह गढ सबसे बडी पट्टी घुडदौडस्यूँ का है । 

पूर्व में गढ़वाल में हर पट्टी की राजधानी गढ के नाम से पहचानी जाती थी ।700 ईसवी मेँ राजा घुरदेव दरबार जब मुगलोँ से पराजित होकर जबउत्तराखंड मेँ शरण लेने आये तो चौँदकोट मेँ उन्हें शरणमिली। चौँदकोट के कबीलाइयोँ से शक का व्यवहार प्रतीत होते ही राजा घुरदेव दरबार ने वहाँ से प्रस्थान कर दिया और अपने लिये पहाड मेँएक वीरान जगह मेँ शरण लेकर एक गढ का निर्माण कर दिया यह जगह कैंत्युरा शासकों की सीमा के अँतर्गत थी या नहीं अभी तक यह स्पष्ट नहीँ हैँ।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस जगह को राजा घुरदेव ने कैँत्युरोँ को हराकर प्राप्त किया। इतना जरुर है कि कैँत्यूरा नरेश ने घुरदेव की बहादुरी से प्रभावित होकर अपनी बेटी सुन्दरा के विवाह का प्रस्ताव रखा या दूसरी बात ये भी हो सकती है कि राजा घुरदेव दरबार सुन्दरा की सुन्दरता की चर्चाओँ से मुग्ध होकर कैँत्यूरोँ को परास्त कर सुन्दरा को पाना चाहते थे लेकिन कैँत्यूरा नरेश घुरदेव दरबार केआक्रमण के दौरान ही सब कुछ गुप्तचरोँ की तरफ से जान गये। अपने को हार से बचाने के लिये उन्हेँ राजा घुरदेव की शर्त के अनुसार ही चलना पडा। वैसे भी कैँत्यूरा नरेश राजा घुरदेव से बहुत प्रभावित थे । राजा घुरदेव ने अपने गढ का नाम सुन्दरा के नाम से सुंदरगढ़ रख दिया।

सुंदरगढ़ एक घाटी मेँ दो नहरोँ के बीच मेँ टीलानुमा पहाडी के अँदर बनाया गया। इसकेअँदर जाने के लिये दो सुरंगें आगे की तरफ से और तीन सुरंगें पीछे की तरफ से बनाई गई थी। जनश्रुतियों के अनुसार रानी का राजमहल भी पहाडी के अन्दर ही था जिसका रास्ता भी इन्हीँ सुरंगों से होकर जाता था । 700 ईसवी से 1300 ईसवी तक घुरदेव के बेटोँ, पोतोँ और परपोतोँ ने इस गढ पर राज किया।

1300 ईसवी के आसपास ओम राणा के आक्रमण से घुरदेव के गुसाईयोँ का राजपाट गढ़वाल से समाप्त हो गया था।कहा जाता है कि गुसाईयोँ ने अपनी चतुराई से गुफाओँ के अन्दर बडे बडे पत्थरो कोडाल कर पूरी राणा सेना का रास्ता बंद कर उन्हेँ अन्दर ही मरने पर विवश करदिया और ओम राणा को भी भागते हुए पकड कर मार डाला । जहां पर ओम राणा कोमारा गया वह स्थान आज भी ओमराणा घाट यानी की उमराण घाट के नाम से प्रसिद्ध है। ओम राणा की पत्नी स्वरुपा की भी राजमहल के अन्दर दम घुटने के कारण मौत हो गयी होगी लेकिन जनश्रुतियों और जागरोँ मेँ उसकी राजमहल के अँदर जाकरआत्महत्या करने की बात कही गई हैँ। ऐसा इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि आज भी उस गुफा में बहुत आगे तक जाना संभव नहीं है. क्योंकि राणा की सेना को खतम करने के लिये घुरदेव के गुसाईयोँ ने बडी-बडी चट्टानोँ से सुरँगोँ को बँद कर दिया ताकि राणाओँ की सेना जिँदा राजमहल से बाहर न निकल सके ।



दगिड्यो,
आज सब्यों कु परिचय एक यनि चीज़ से कराणु छौं जु हमरा इतिहास मा बड़ी ख़ास जगा रख्दि छै। आज जरुर नै ज़मना क नौन्याल बुल ला कि मि क्य बात कनु छौं पण सच यु च कि यांकु हम सब्यों क वास्ता बडू योगदान रै। वे ज़मना मा यु दिख्ये जा त ब्वै कु हि रूप छौ। मै बात कनु छौं "उरख्यलि" की ज्व कबि हरेक चौकै तिरालि दिख्यान्दि छै, जैमा रोज नाज कुटेंदु छौ अर फेर हम खांदा छाया। आज य विलुप्ति कि कगार पर च, पर मि नि चंदु कि हम यीथैं यन बिसरि जा। एक कविता हमरा पुरण्यों कि ईं सैन्दाण "उरख्यलि" थैं समर्पित।

बिसरी ग्याँ तुम जैथैं, मै व़ी नखरयलि छौं,
जरा पछ्याँणा त भुलों मैथै, मै तुमरि हि उरख्यलि छौं।

तुमरु मेरो साथ साख्यों बिटी च,
ब्वै क हतु कि रुटलि, भैणि राख्यों बिटी च
तुम भूकन कबि रुयाँ त मि ब्वै बणी ग्यों,
मौस्याँण सि चा रयुं भैर, पण मौस्याँण कबि नि रौं,
मि सुप्पु कि दगड्या अर दीदि गंज्यलिक छौं,
पछ्याँण तुमुन मैथै, मै तुमरि हि उर्ख्यलि छौं।

ददि-दाज्यों बारम भुलों बड़ी सज-समाल छै,
धुवै-पुछ्ये कि, रोज कुटे कि होंदि जग्वाल छै,
ब्यो-पगिन्यों बेर मैमु बि रान्दि हल्दयाण छै,
बार-त्योहारों कि वे बगत अहा कनि रस्याँण छै,
पितरों कि सैन्दांण भुलों, मै नाजै औंज्यलि छौं,
पछ्याँण तुमुन मैथै, मै तुमरि हि उर्ख्यलि छौं। 


"बदल्याँ मनखि, बदल्युं समाज"



दगिड्यो,
दानों क गिच्चा बिटी झणी कथ्गा बगत सूणि कि पुरणा जमना क लोग कथु सीधा-सच्चा अर प्यार-प्रेम वला हूंदा छाया। आजै बगतै हालत देखि मिथें पुरण्यों कि वु छ्वीं याद ऐ ग्येनि अर मि वे लोक मा पौंछि गयुं जु मैखुणि बि कल्पना हि च। पण कुच बच्याँ पुरण्यों देखि जरूर विस्वास होंद कि यनु रै होलु। मिथें म्येरू कविता कु विषय मिलि ग्ये अर आप लोखु कि मजबूरि च कि पौढ़न पोडली जु बि लिख्युं।

वुंन मै विस्वास दिलांदु कि भलि लगलि किलै कि आजौ सच च यु।

वे ज़मना मनखि, अब कख गै होला,
बिन भै -बंद छै भयात जौंमा, वु कु रै होला।।

आज कन्फ़णि सि बगत अयूँ च,
भै न भै कु हि मुंड कच्ययूँ च,
प्यार-प्रेमै छ्वीं, छ्वीं हि रै ग्ये,
नातु, धरती -असमान ह्वै ग्ये,
वे ज़मना …………. रै होला।

रुण्या मुख छन, आख्यों अन्स्धरि,
रुन्दा मुलुक छन, डरदि किल्क्वरि,
रिस्ता नातों कि कै नि फिकर अब,
नौनों, बुबा कि रै नि कदर अब,
वे ज़मना …………. रै होला।

गिच्चि सिलीं छन, लग्याँ छन म्वाला,
भिंडी तमसगेर, कम छन बुन्न वला,
अफखुणि अफ़ी सरम करीं च,
मनख्यात झणि कख म्वरीं च,
वे ज़मना …………. रै होला।

लग्युं असगार मुलुक थैं भारी,
रौड़ -बौग कि अयीं बेमारि,
येमा बि खैंचा-खैंच हुईं च,
तू नीस, मै ऐन्च हुईं च,
वे ज़मना …………. रै होला।

यन बि एक बगत छौ होंदो,
कूड़ू चा कैकु बि हो चुंदु,
सब्यों न मिलि कि पटलि मिस्याई,
पण रगड़-बगण होणि नि दयाई,
वे ज़मना …………. रै होला।

कैथैं यिख कसुरबार ठेरोँ अब,
अपड़ू गुठ्यार, क्वी नि भैरौ जब,
अपणों - अपणों मा कनि लडै या,
भितिर- भैर कनि मुंड फ़्वडै या,
वे ज़मना …………. रै होला।

ऐकि क्वी सम्झावदि यूँ थैं,
प्रेमो पाठ पढ़ावदि यूँ थैं,
लडि-भिड़ी क्वी महान नि ह्वै यिख,
हिटलरौ कबि सम्मान नि ह्वै यिख,
वे ज़मना …………. रै होला।